Parampurush Shri Shri Ramkrishn (Pratham Evam Dvitiya Khand)

Parampurush Shri Shri Ramkrishn (Pratham Evam Dvitiya Khand)

Achintyakumar Sen Gupta · Panchsheel Prakashan

Hindi · Paperback · Edition: First, 2007

₹450 ₹500 10% off

Parampurush Shri Shri Ramkrishn (Pratham Evam Dvitiya Khand) उन्नीसवीं शताब्दी के शीर्ष-पुरुष रामकृष्ण परमहंस की जीवन-लीला का अंतरंग प्रस्तुतिकरण। अचिन्त्यकुमार सेन गुप्ता की यह कृति उनके दिव्य ज्ञानालोक, आध्यात्मिक उद्भावनाओं और नवजागरण में उनकी भूमिका को दर्शाती है, जहाँ उन्होंने तर्क-बुद्धि को सत

उन्नीसवीं शताब्दी के बौद्धिक जगत के शीर्ष-पुरुष रामकृष्ण परमहंस एक ऐसी अप्रतिम मेधा के रूप में अवतरित हुए जिनके ज्ञान-प्रकाश से पूरा युग आलेकित हो गया। लगभग निपढ़ रामकृष्ण परमहंस दिव्य विभूति थे, जिनकी आध्यात्मिक विभूति के प्रवक्ता नवजागरण के नायक केशवचन्द्र सेन बने। शास्त्रज्ञ पण्डितों और विशिष्ट साधकों- गुरुओं की शास्त्रीय सम्पदा की ज्योति रामकृष्ण परमहंस के अलौकिक आलोक से अनुशासित हुई। वेद-उपनिषद के ज्ञान से निपट अपरिचित रामकृष्ण परमहंस औपनिषदिक ऋषियों की तरह मेधा, बहुश्रुतता और तर्क को सत्योपलब्धि के लिए अपर्याप्त ही नहीं, बाधक मानते थे। इसलिए अपनी आराधना भवतारिणी माँ से आर्त्तस्वर में उन्होंने प्रार्थना की थी, “माँ, मेरी तर्क-बुद्धि पर वज्रपात कर दो ताकि तुम्हारे रूप लावण्य को अहर्निश देखता रहूँ।”. बौद्धिक तर्क-वितर्क से उत्पन्न उन्नीसवीं शताब्दी के सघन तमस में परमहंस ने आस्था का दीप जलाया जिसका प्रकाश नवजागरण के महानायकों के लिए पथ प्रदर्शक बना। अपने आलोक आपूरित लीला-प्रसंग और सहज आध्यात्मिक उद्भावना के आत्मीय स्पर्श से रामकृष्ण परमहंस ने अपने समय के तत्वदर्शियों, विदग्धजनों, कदाचार लिप्त कुख्यातों, पतिता नारियों, अस्पृश्य अभिशाप से आहत लोगों तथा दुर्भाग्यग्रस्त जनों का उद्धार किया। उन्नीसवीं शताब्दी के सांस्कृतिक नवजागरण का इतिहास रामकृष्ण परमहंस के दिव्य ज्ञानालोक से ही समझा जा सकता है। प्रस्तुत कृति इसी लीला-पुरुष रामकृष्ण परमहंस की जीवन-लीला का अंतरंग प्रस्तुत करती है जिसमें निमग्न होकर पाठक स्वयं को भी पवित्र अनुभव कर सकता है। श्रीमती शान्ति भार्गव ने बंगला भाषा की कृति का हिन्दी अनुवाद पूरी तन्मयता से किया है।

ISBN-139788170563914
AuthorAchintyakumar Sen Gupta
PublisherPanchsheel Prakashan
LanguageHindi
BindingPaperback
EditionFirst, 2007
Pages400
Year2007
SubjectBiographies & Memoirs

Category: Biographies & Memoirs

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