Gurjar Vansh Ka Itihas

Gurjar Vansh Ka Itihas

P.D. Gurjar · Panchsheel Prakashan

Hindi · Paperback · Edition: Second, 2012

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प्रस्तुत कृति इस दृष्टि से बहुत महत्त्व रखती है कि डॉ. पी. डी.

प्रस्तुत कृति इस दृष्टि से बहुत महत्त्व रखती है कि डॉ. पी. डी. गुर्जर ने श्रमपूर्वक उन सभी स्रोतों का अवगाहन किया जो इस राजवंश की सत्ता की उपलब्धियों की विश्वसनीय जानकारी देते हैं। लेखक ने विषय से सम्बन्धित सभी उपलब्धियों का अध्ययन किया, उनकी सीमाओं का परीक्षण किया, अन्य उपलब्ध साक्ष्यों का विश्लेषण किया तथा अपने मौलिक निष्कर्ष दिये। इस प्रकार गुर्जर प्रतिहार राजवंश के इतिहास पर डॉ. पी. डी. गुर्जर की यह कृति एक सम्पूर्ण और प्रामाणिक अध्ययन है। भारतीय इतिहास की प्रवाहित अनवरत धारा में सांस्कृतिक, सामाजिक और कला कौशल के बहुमुखी उन्नयन की दृष्टि से पूर्व मध्यकाल का विशेष महत्त्व है। हर्षोत्तर युग में उत्तरी भारत में उदित गुर्जर-प्रतिहार राजवंश की बलवान सत्ता ने देश की अराजक और अस्थिर स्थितियों को एकसूत्र में बांधा तथा समाज में चल रही सांस्कृतिक विघटन की प्रक्रिया को रोका। भारतीय इतिहास में गुर्जर प्रतिहार राजवंश की उत्पत्ति पर यद्यपि इतिहासकार एकमत नहीं हैं तथा इस राजवंश की उपलब्धियों को सभी स्वीकार करते हैं। दुर्भाग्यवश गुर्जर प्रतिहार राजवंश की राजनैतिक और सांस्कृतिक उपलब्धियों का सम्यक् विवेचन अभी तक नहीं हुआ, इसका कारण इतिहासकारों की उदासीनता ही रही है। इस राजवंश ने एक ओर भारतीय समाज को स्थिरता प्रदान की तो दूसरी ओर मुस्लिम आक्रान्ताओं से उत्तरी भारत की रक्षा की। इस राजवंश के पराक्रम से भारत को सर्वथा नये युग का आस्वादन लेने का अवसर मिला।

ISBN-139788170565147
AuthorP.D. Gurjar
PublisherPanchsheel Prakashan
LanguageHindi
BindingPaperback
EditionSecond, 2012
Pages246
Year2010
SubjectHistory

Category: Textbooks & Study Guides

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