21St Sadi Aur Sahitya Vimarsh
Dr. Kalpna Morya · Panchsheel Prakashan
21वीं सदी हिन्दी साहित्य की दुनिया में अनेक विमर्शों पर लगातार चिंतन और मनन हो रहा है। अनेक कहानियों, उपन्यासों कविताओं में जो जीवन के व्यापक अनुभवों को साहित्य में निरंतर अभिव्यक्ति दे रहे हैं इससे साहित्य में अनेक विमर्शों की शुरुआत हुई। वर्तमान में प्रमुख विमर्श हैं स्त्री विमर्श, दलित विमर्श, आद
21वीं सदी हिन्दी साहित्य की दुनिया में अनेक विमर्शों पर लगातार चिंतन और मनन हो रहा है। अनेक कहानियों, उपन्यासों कविताओं में जो जीवन के व्यापक अनुभवों को साहित्य में निरंतर अभिव्यक्ति दे रहे हैं इससे साहित्य में अनेक विमर्शों की शुरुआत हुई। वर्तमान में प्रमुख विमर्श हैं स्त्री विमर्श, दलित विमर्श, आदिवासी विमर्श, थर्ड जेंडर विमर्श आदि हैं। भूमण्डलीकरण, वैश्वीकरण, नवपूँजीवाद, बाजारवाद और उत्तराधुनिक समय की राजनैतिक व्यवस्था पश्चिमी देशों के प्रभाव विचारकों के कारण साहित्य का परिदृश्य बहुत बदल गया है। इस 21वीं सदी में अनेक सामाजिक राजनीतिक एवं सांस्कृतिक परिवर्तन के प्रभाव में साहित्य की विषयवस्तु चिंतन भूमि सामाजिक सरोकार भाषा शिल्प में व्यापक परिवर्तन हुआ है। विमर्शों का अध्ययन मनन, चिंतन और संगोष्ठी करना इसलिए आवश्यक है ताकि हम अपनी आने वाली पीढ़ी को बता सकेंगे।
| ISBN-13 | 9788170566748 |
|---|---|
| Author | Dr. Kalpna Morya |
| Publisher | Panchsheel Prakashan |
| Language | Hindi |
| Binding | Paperback |
| Edition | First |
| Pages | 160 |
| Year | 2021 |
| Subject | Hindi |
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