Aadhunik Bharat Ka Itihas (1858-1919)
Shivkumar Gupt · Panchsheel Prakashan
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1858 के बाद के भारत का परिदृश्य पिछली शताब्दी से सर्वथा भिन्न था। इस युग का केन्द्रीय विषय भारतीय बौद्धिक मन पर पाश्चात्य प्रभाव है। 1857 के पूर्व ही भारत में एक राष्ट्रीय चेतना का जन्म हो चुका था जो एक लम्बी प्रक्रिया का परिणाम थी। अंग्रेजी शिक्षा के माध्यम से भारतीय विचारों में जो क्रान्तिकारी परि
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