Aadhunik Bharat Ka Itihas (1919-1950 E.)
Shivkumar Gupt · Panchsheel Prakashan
1920 के बाद का भारतीय इतिहास गांधीवादी युग से सम्बन्धित है। इस युग में गांधीजी के व्यक्तित्व और विचारों के अनुसार ही राष्ट्रीय आन्दोलन प्रगतिमान हुआ। भारतीय स्वतन्त्रता आन्दोलन गांधीजी की उपलब्धियों का इतिहास है। गांधीजी के पूर्व विश्व में सशस्त्र क्रान्ति ही स्वतन्त्रता प्राप्ति का एक मात्र मार्ग म
1920 के बाद का भारतीय इतिहास गांधीवादी युग से सम्बन्धित है। इस युग में गांधीजी के व्यक्तित्व और विचारों के अनुसार ही राष्ट्रीय आन्दोलन प्रगतिमान हुआ। भारतीय स्वतन्त्रता आन्दोलन गांधीजी की उपलब्धियों का इतिहास है। गांधीजी के पूर्व विश्व में सशस्त्र क्रान्ति ही स्वतन्त्रता प्राप्ति का एक मात्र मार्ग माना जाता था। गांधीजी ने इस मार्ग के विपरीत अहिंसापरक सत्याग्रह और असहयोग के मार्ग का प्रयोग कर स्वतन्त्रता दिलाई। यह एक आश्चर्यजनक घटना थी। गांधीजी के उदय के पूर्व अंग्रेजी शिक्षा, न्याय और उदारवाद से प्रभावित भारतीय बुद्धिवादियों ने कांग्रेस की स्थापना करके संवैधानिक मार्ग से राज्य प्राप्त करने का आग्रह किया था। कांग्रेस का इतिहास उदारवादी और उग्रवादी विचारों के संघर्ष का इतिहास है। लेकिन 1920 में गांधीजी के राजनीति में प्रवेश के बाद कांग्रेस का वैचारिक और क्रियात्मक परिदृश्य बिल्कुल बदल गया। गांधीजी ने राजनीतिक रंगमंच पर आते ही सर्वप्रथम अपने देशवासियों को पहिचानने के लिए और भावात्मक धरातल पर उनकी सोच को समझने के लिए सारे देश का भ्रमण किया और इस निर्णय पर पहुंचे कि जब तक सामान्यजन में यह भावना पैदा नहीं होगी कि वे भारतीय राष्ट्र का अंग हैं और उन्हें अपने देश के वर्तमान और भविष्य का जैसा चाहे वैसा रूप देने का अधिकार है तब तक स्वतन्त्रता संग्राम सफल नहीं हो सकता। इसलिए गांधीजी ने भारतीय जनमानस को समझकर नए सूत्रों का अन्वेषण किया। उन्होंने सत्याग्रह, असहयोग आन्दोलन, सविनय अवज्ञा जैसे उपायों से स्वराज्य प्राप्ति का लक्ष्य निर्धारित किया। इन आन्दोलनों के द्वारा खुला विद्रोह नयी बात थी। गांधीजी ने कांग्रेस के संवैधानिक आन्दोलन को जन आन्दोलन बना दिया। गांधीजी को कांग्रेस का पर्यायवाची माना जाने लगा। उन्होंने भारतीय जनता के मन से भय दूर करके उन्हें निडर बना दिया। यह चमत्कारिक कार्य था। गांधीजी के पूर्व जो कार्य शिक्षित कांग्रेसी कर रहे थे वह अब समस्त भारतवासियों का हो गया। इसका सबसे बड़ा कारण गांधीजी का सादा जीवन, दृढ़ विचार, असाधारण बुद्धिमत्ता, ईश्वर में निष्ठा, जनता में आस्था और सत्य में असीम विश्वास था। फिर भी गांधीजी को अपने प्रयासों में पूर्ण सफलता प्राप्त नहीं हुई। उन्हें अपने राजनीतिक जीवन में अनेक उतार-चढ़ाव देखने पड़े। अपने अथक प्रयासों के बावजूद वे वह सब प्राप्त नहीं
| Author | Shivkumar Gupt |
|---|---|
| Publisher | Panchsheel Prakashan |
| Language | Hindi |
| Binding | Paperback |
| Edition | Reprint, 2009 |
| Pages | 342 |
| Year | 1999 |
| Subject | Indian Culture & History |
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