Vyangya Vidhya ke Vikas me Dr. Ajay Anuragi ka yogdan

Vyangya Vidhya ke Vikas me Dr. Ajay Anuragi ka yogdan

Dr. Manju · Panchsheel Prakashan

Hindi · Paperback · Edition: First, 2022

₹495 ₹550 10% off

Vyangya Vidhya ke Vikas me Dr. Ajay Anuragi ka yogdan ‘व्यंग्य विधा के विकास में डॉ. अजय अनुरागी का योगदान’ विषय पर केंद्रित यह पुस्तक, डॉ. मंजू द्वारा लिखित, समकालीन व्यंग्य साहित्य में डॉ.

इसी पुस्तक से… ‘व्यंग्य विधा के विकास में डॉ. अजय अनुरागी का योगदान’ विषयान्तर्गत विभिन्न सोपानों से गुजरते हुए प्रतीत हो रहा है कि समकालीन व्यंग्य साहित्य के परिदृश्य में डॉ. अजय अनुरागी एक महत्वपूर्ण हस्ताक्षर हैं जिनके बिना समकालीन व्यंग्यधारा को समझा ही नहीं जा सकता है। उनका लेखन बीसवीं शताब्दी के अंतिम दशक से प्रारम्भ होकर इक्कीसवीं सदी के प्रारम्भिक दशकों की विशेषताओं को अपने भीतर समेटे हुए है। उन्होंने व्यंग्य के विविध रंगों एवं विविध रूपों का सृजन करके व्यंग्य विधा को समृद्ध किया है तथा उसके विकास को वेगवान बनाया है। डॉ. अजय अनुरागी जैसे व्यंग्यकारों के उन्नत लेखन से हिन्दी व्यंग्य विधा का गौरव बढ़ा है। डॉ. अजय अनुरागी की व्यंग्य दृष्टि व्यापक रही है और पैनी भी बनी रही है। उसमें लेखन के साथ-साथ विश्लेषण एवं मूल्यांकन की क्षमता भी मौजूद है। इस कारण अजय अनुरागी व्यंग्य लेखन के साथ-साथ व्यंग्य आलोचना में भी अपना योगदान देते आ रहे हैं। व्यंग्य विधा के विकास में व्यंग्यालोचना का भी अनिवार्य महत्व हुआ करता है। आलोचना ही रचना को पढ़वाती है तथा निखारती है। इस दृष्टि से अजय अनुरागी की व्यंग्यालोचन प्रतिभा रेखांकित किये जाने योग्य है। व्यंग्य आलोचना की दृष्टि रखने वाला लेखक व्यंग्य लेखन की दृष्टि से स्वयं परिमार्जित होता रहता है। प्रस्तुत पुस्तक में डॉ. अजय अनुरागी की इसी व्यंग्य प्रतिभा को उभारकर उसके व्यंग्य विधागत विकास में किये गये योगदान को रेखांकित किया गया है।

ISBN-139788170566854
AuthorDr. Manju
PublisherPanchsheel Prakashan
LanguageHindi
BindingPaperback
EditionFirst, 2022
Pages240
Year2022
SubjectHindi

Category: Textbooks & Study Guides

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