Sanskrit Ke Pauranik Mahakavya

Sanskrit Ke Pauranik Mahakavya

Dr. Rajesh Kumari Mishra · Panchsheel Prakashan

Hindi · Paperback · Edition: Second, 2011

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महाकाव्य की कथावस्तु दो प्रकार की होती है-कल्पना प्रसूत एवं परम्परा गृहीत। परम्परा गृहीत कथावस्तु के अन्तर्गत ही पुराणों से प्राप्त वस्तु भी है। संस्कृत के श्रेष्ठ आलोच्य महाकाव्य, पौराणिक विषयों के ही हैं। वस्तुतः उनमें हमारी सांस्कृतिक चेतना के समृद्ध स्वरूप की धरोहर भी सुरक्षित है, तभी तो श्रेष्ठ

महाकाव्य की कथावस्तु दो प्रकार की होती है-कल्पना प्रसूत एवं परम्परा गृहीत। परम्परा गृहीत कथावस्तु के अन्तर्गत ही पुराणों से प्राप्त वस्तु भी है। संस्कृत के श्रेष्ठ आलोच्य महाकाव्य, पौराणिक विषयों के ही हैं। वस्तुतः उनमें हमारी सांस्कृतिक चेतना के समृद्ध स्वरूप की धरोहर भी सुरक्षित है, तभी तो श्रेष्ठ महाकाव्यकार भी पौराणिक आख्यानों को महत् काव्य के इतिवृत्त विधान के लिए ग्रहण करते रहे हैं। रघुवंश, किरातार्जुनीय, शिशुपालवध, नैषधचरित आदि पौराणिक महाकाव्यों पर पुराणों के परिप्रेक्ष्य में अथवा पौराणिक महाकाव्य की दृष्टि से आलोच्य महाकाव्यों का अध्ययन प्रथम बार प्रस्तुत किया गया है। संस्कृत के पौराणिक महाकाव्यों के इस अध्ययन में पौराणिक महाकाव्य परम्परा के स्वरूप को व्यवस्थित करने का प्रयास किया गया है, इसके साथ ही पौराणिक महाकाव्यों में व्याप्त सामाजिक एवं जातीय जीवन की चेतना का आकलन भी किया गया है, अतः संस्कृत साहित्य के क्षेत्र में कार्य करने वाले विद्यार्थी एवं विद्वानों के लिए इसका अध्ययन साहित्यिक तथा सांस्कृतिक दृष्टि से उपयोगी रहेगा

ISBN-139788170563976
AuthorDr. Rajesh Kumari Mishra
PublisherPanchsheel Prakashan
LanguageHindi
BindingPaperback
EditionSecond, 2011
Pages332
Year2007
SubjectSpirituality & Philosophy

Category: Religion & Spirituality

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