Shrimad Bhagvat Anushilan

Shrimad Bhagvat Anushilan

Balakrishna Rao · Panchsheel Prakashan

Hindi · Paperback · Edition: Second, 2011

₹480 ₹600 20% off

भारतीय मानस की निर्मिति में सबसे बड़ा योगदान राम की कथा और महाभारत की कथा का है। श्रीमद्भागवत् संस्कृत का एक ऐसा ग्रंथ है जिसमें कहने को तो कृष्ण की कथा है किन्तु वास्तव में यह ग्रंथ भारतीय मनीषा का सर्वोत्तम प्रतिफल है। जो कुछ संसार में है वह सब भागवत में और जो भागवत में नहीं है वह कहीं नहीं है। इस

भारतीय मानस की निर्मिति में सबसे बड़ा योगदान राम की कथा और महाभारत की कथा का है। श्रीमद्भागवत् संस्कृत का एक ऐसा ग्रंथ है जिसमें कहने को तो कृष्ण की कथा है किन्तु वास्तव में यह ग्रंथ भारतीय मनीषा का सर्वोत्तम प्रतिफल है। जो कुछ संसार में है वह सब भागवत में और जो भागवत में नहीं है वह कहीं नहीं है। इस ग्रंथ की कथा एक विशाल सागर के समान है जिसका ओर-छोर पाना कठिन है पर इस कथा के पारायण से मनुष्य सब कुछ पा सकता है। यह कोरा धार्मिक ग्रंथ नहीं है बल्कि भारतीय चिंतन का सार है। चिंतन और दर्शन को बोधगम्य बनाने के लिए इस ग्रंथ में भगवद्लीला की सरस कथाओं को समाहित कर दिया गया है। मानव जीवन का लक्ष्य आनंद की प्राप्ति ही तो है-वह आनंद जिसे प्राप्त करने के बाद कुछ भी पाने की लालसा शेष नहीं रह जाती। ‘श्रीमद्भागवत्’ की कथा पाठक/श्रोता को अनिर्वचनीय आनंद की प्रतीति कराती है। श्री बालकृष्ण राव द्वारा रचित ‘श्रीमद्भागवत् अनुशीलन’ ग्रंथ इस दृष्टि से सर्वथा भिन्न है कि इसमें किया गया अनुशीलन केवल धार्मिक व्याख्याओं तक सीमित नहीं रहता प्रत्युत पाठक की साहित्यिक और रचनात्मक वृत्तियों और जिज्ञासाओं को शान्त करता है।’ श्रीमद्भागवत्’ के अनुशीलन में लेखक की मौलिकता और उसका वैदुष्य साफ झलकते हैं इसलिए यह कृति ‘श्रीमद्भागवत्’ के अन्य अनुशीलनों से सर्वथा भिन्न है।

ISBN-139788170563105
AuthorBalakrishna Rao
PublisherPanchsheel Prakashan
LanguageHindi
BindingPaperback
EditionSecond, 2011
Pages408
Year2005
SubjectSpirituality & Philosophy

Category: Religion & Spirituality

Buy Now

Related books

India's trusted online book store