Bharat Me Rajyon Ke Rajneete Bhagh-2
Prof. Dharamchand Jain · Panchsheel Prakashan
1967 ई. के चतुर्थ आमचुनाव का भारतीय राजनीतिक व्यवस्था में अपूर्व महत्त्व है। इसने राज्यों में कांग्रेस के एकाधिकार को समाप्त किया। अनेक राज्यों में गैरकांग्रेसी सरकारें सत्ता में आई। लेकिन ये सरकारें अस्थिरता का पर्याय बन गई। 1967 से 1972 ई.
1967 ई. के चतुर्थ आमचुनाव का भारतीय राजनीतिक व्यवस्था में अपूर्व महत्त्व है। इसने राज्यों में कांग्रेस के एकाधिकार को समाप्त किया। अनेक राज्यों में गैरकांग्रेसी सरकारें सत्ता में आई। लेकिन ये सरकारें अस्थिरता का पर्याय बन गई। 1967 से 1972 ई. के राज्य विधानसभा के चुनाव के पूर्व अवधि तक दलबदल, मध्यावधि चुनाव, राज्यपालों की विवादास्पद भूमिका, राज्यों में राष्ट्रपति शासन, राज्यों की उथल-पुथल की राजनीति की प्रवृत्तियों के रूप में उभरी। इन सब प्रवृत्तियों का वर्णनात्मक, व्याख्यात्मक तथा विश्लेषणात्मक वर्णन किया गया है।
| ISBN-13 | 9788170566908 |
|---|---|
| Author | Prof. Dharamchand Jain |
| Publisher | Panchsheel Prakashan |
| Language | Hindi |
| Binding | Paperback |
| Edition | First |
| Pages | 248 |
| Year | 2023 |
| Subject | Political Science |
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