Bhartiya Banking Pranali

Bhartiya Banking Pranali

Prof. B.L. Mathur · Panchsheel Prakashan

Hindi · Paperback

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बैंकिंग क्षेत्र में निरन्तर हो रहे परिवर्तनों के बावजूद इसके जिस स्वरूप से हम पूर्व में अवगत थे, वह समाप्त हो चुका है। इलैक्ट्रानिक बैंकिंग के संचालन के बावजूद बैंकिंग के विद्यमान ढांचे एवं कार्य संचालन में विशेष परिवर्तन घटित हुए हैं। आगामी वर्षों में इन परिवर्तनों की श्रृंखला में महत्त्वपूर्ण जुड़

बैंकिंग क्षेत्र में निरन्तर हो रहे परिवर्तनों के बावजूद इसके जिस स्वरूप से हम पूर्व में अवगत थे, वह समाप्त हो चुका है। इलैक्ट्रानिक बैंकिंग के संचालन के बावजूद बैंकिंग के विद्यमान ढांचे एवं कार्य संचालन में विशेष परिवर्तन घटित हुए हैं। आगामी वर्षों में इन परिवर्तनों की श्रृंखला में महत्त्वपूर्ण जुड़ाव की प्रबल सम्भावनायें हैं। अब इस बात पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है कि बैंकिंग का भौगोलिक अथवा संख्यात्मक विकास के बजाय गुणात्मक विकास को सम्भव बनाया जाये। भारतीय बैंकिंग प्रणाली विषय पर प्रस्तुत पुस्तक की विषय सामग्री में इसके निरन्तर बदलते हुए स्वरूप, इसके उत्पन्न समस्याओं तथा उनके समाधान से सम्बन्धित विस्तृत एवं महत्त्वपूर्ण सामग्री प्रस्तुत की गई है। पुस्तक की विषय सामग्री विषय से सम्बन्धित छात्रों, अध्यापकों, शोधार्थियों तथा नीति-निर्धारकों के लिए विशेष रूप से उपयोगी सिद्ध होगी।

ISBN-139788170565895
AuthorProf. B.L. Mathur
PublisherPanchsheel Prakashan
LanguageHindi
BindingPaperback
Pages320
Year2013
SubjectEconomics

Category: Business, Management & Economics

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