Prayojanmoolak Hindi

Prayojanmoolak Hindi

Vijay Kulshresth · Panchsheel Prakashan

Hindi · Paperback

₹640 ₹800 20% off

प्रयोजनमूलक हिन्दी का प्रयोग क्षेत्र सामान्यतः राजकाज की हिन्दी भाषा तक ही सीमित मान लिया जाता है, पर वास्तविकता यह है कि वह प्रारूपण एवं टिप्पण लेखन की कार्यालयी भाषा मात्र नहीं है, वह अपने व्यापक अर्थ में कार्यालयेतर विषयों तक अपनी पहुँच बनाती है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने इसे समझा और व्यापक रू

प्रयोजनमूलक हिन्दी का प्रयोग क्षेत्र सामान्यतः राजकाज की हिन्दी भाषा तक ही सीमित मान लिया जाता है, पर वास्तविकता यह है कि वह प्रारूपण एवं टिप्पण लेखन की कार्यालयी भाषा मात्र नहीं है, वह अपने व्यापक अर्थ में कार्यालयेतर विषयों तक अपनी पहुँच बनाती है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने इसे समझा और व्यापक रूप से इसके विस्तार-क्षेत्र की महत्ता समझाने का प्रयास किया है। आज हिन्दी का यह व्यावसायिक स्वरूप ही प्रयोजनमूलक बनकर अध्येताओं के सामने है, जिसका प्रयोग जीवन के हर क्षेत्र में हो रहा है। पत्रकारिता एवं उसके विविध रूप, समाचार लेखन (रिपोर्टिंग), प्रूफ पठन, साक्षात्कार, पत्रकारवार्ता, प्रेस प्रबंधन, प्रेस कानून, संचार माध्यम : स्वरूप, प्रकृति और चरित्र, रेडियो- टेलीविजन-फिल्मपरक लेखन, विज्ञापन, इण्टरनेट पर ऑनलाइन पत्रकारिता और वेब पोर्टल-लेखन- संकलन एवं संपादन विषयों के क्षेत्र में प्रयोजनमूलक हिन्दी का नया स्वरूप विकसित हुआ है। सैद्धांतिक रूप में उक्त विषयों को समझाने के साथ उसके अनुप्रयोग (एप्लीकेशन) और व्यावहारिक स्वरूप को समझाने में लेखक ने इस कृति में यथास्थान उद्धरण, रेखांकन, ग्राफ्स आदि प्रस्तुत कर इस विषय को अधिक सुगम बनाया है।

ISBN-139788170564782
AuthorVijay Kulshresth
PublisherPanchsheel Prakashan
LanguageHindi
BindingPaperback
Pages440
Year2009
SubjectHindi Language & Literature

Category: Textbooks & Study Guides

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