Aadhunik Bharat Ka Rajneetik Aarthik Avam Samajik Itihas (Bhagh-1)
Kaluram Sharma, Prakash Vyas · Panchsheel Prakashan
मुगल सम्राट औरंगजेब की मृत्यु से लेकर भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस की स्थापना तक का काल भारतीय इतिहास का एक युगान्तकारी युग था। भारत में यूरोपीय शक्तियों का आगमन, उनकी व्यापारिक प्रतिद्वन्द्विता और अन्त में ब्रिटिश साम्राज्य की स्थापना का भारतीय जन-जीवन पर व्यापक प्रभाव पड़ा। भारत में पाश्चात्य विचारों
मुगल सम्राट औरंगजेब की मृत्यु से लेकर भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस की स्थापना तक का काल भारतीय इतिहास का एक युगान्तकारी युग था। भारत में यूरोपीय शक्तियों का आगमन, उनकी व्यापारिक प्रतिद्वन्द्विता और अन्त में ब्रिटिश साम्राज्य की स्थापना का भारतीय जन-जीवन पर व्यापक प्रभाव पड़ा। भारत में पाश्चात्य विचारों के अनुकूल औपनिवेशिक प्रशासनिक व्यवस्था स्थापित की, नई भू-राजस्व व्यवस्था को लागू किया और पाश्चात्य शिक्षा के द्वारा भारतीयों की मानसिकता को भी बदलने का प्रयास किया गया। अँग्रेजों की इन प्रतिक्रियावादी नीतियों ने भारतीयों की सुप्त भावनाओं को जागृत कर दिया। फलस्वरूप भारत में पुनर्जागरण एवं सामाजिक-धार्मिक सुधार आन्दोलनों ने अँग्रेजों के प्रयासों में एक अवरोध उत्पन्न कर दिया। इन सुधारों ने भारत में राष्ट्रीय चेतना का संचार किया, जिसके फलस्वरूप राष्ट्रीय काँग्रेस की स्थापना हुई। प्रस्तुत ग्रन्थ में इन्हीं घटनाओं का विश्लेषणात्मक विवेचन किया गया है। साथ ही, भारत में अँग्रेजी व देशी भाषाओं के समाचार पत्रों के विकास और महिलाओं की स्थिति का भी रोचक वर्णन किया गया है। यद्यपि आधुनिक भारत के इतिहास (1707 ई. से 1950 ई.) पर अनेक खण्डों का प्रणयन सम्भव है, तथापि विद्वान लेखकद्वय ने इस सम्पूर्ण कालखण्ड को दो भागों में विवेचित कर गागर में सागर भरने का प्रयास किया है। विद्वान लेखकद्वय ने इस काल-खण्ड पर हुई अब तक की शोध तथा उपलब्ध सामग्री का भी उपयोग किया है तथा पूर्ववर्ती विद्वानों एवं ब्रिटिश लेखकों की मान्यताओं का विश्लेषण कर उनकी भ्रान्त धारणाओं का पुष्ट प्रमाणों एवं प्रतियुक्तियों से खण्डन किया है। प्रस्तुत ग्रन्थ से इतिहास के अध्ययन में न केवल नया आयाम विकसित हुआ है बल्कि इससे आज की युवा पीढ़ी प्रेरणा भी ग्रहण कर सकेगी।
| ISBN-13 | 9788170562610 |
|---|---|
| Author | Kaluram Sharma, Prakash Vyas |
| Publisher | Panchsheel Prakashan |
| Language | Hindi |
| Binding | Paperback |
| Edition | Second, 2011 |
| Pages | 512 |
| Year | 2004 |
| Subject | Indian Culture & History |
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