Meghdoottam (Sampooran) Of Mahakavi Kalidash Virchitam-Translation By Dr. Shivbalak Dwivedi
Dr. Shivbalak Dwivedi · Chaukhambha Orientalia Delhi
मेघदूत की इस व्याख्या में प्रत्येक श्लोक का अन्वय, पदच्छेद, अन्वय, शब्दार्थ, भाषानुवाद, संस्कृतव्याख्या, पदव्याख्या, व्याकरण, समास, कोश, व्युत्पत्ति, गुण, रीति, रस, अलङ्कार, छन्द के साथ ही साथ काव्यशास्त्रीय सौन्दर्य एवं ध्वनितत्त्व के चमत्कार को दिखलाया गया है। भूमिकाभाग में संस्कृत भाषा का महत्त्व, संस्कृतकाव्य का उद्भव एवं विकास, काव्य का प्रयोजन, स्वरूप एवं लक्षण, काव्यभेद, महाकाव्य का लक्षण, गीतिकाव्य तथा खण्डकाव्य की मीमांसा, का उद्भव एवं विकास, महाकवि कालिदास का जीवनवृत्त एवं स्थितिकाल, मेघदूत का साहित्यिक मूल्यांकन आदि विषयों की विस्तारपूर्वक समीक्षा की गई है। परिशिष्ट भाग में मेघदूत में आये हुए भौगोलिक स्थानों की मीमांसा, महाकवि कालिदास विषयक प्रशस्तियाँ एवं सुभाषित पदों को प्रस्तुत किया गया है। इस प्रकार इस व्याख्या को छात्रों के लिए पूर्णरूप से उपयोगी बनाने के लिए प्रयत्न किया गया है।
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