प्रस्तूतितन्त्र एवं स्त्रीरोगविज्ञान- Prasuti Tantra Evam Striroga Vigyan (Comprehensive Approach To Obstetrics And Gynaecology) Based On Ccim
Dr. Krishankant Pandey · Chaukhambha Orientalia Delhi
प्रस्तुत पुस्तक को दो खण्डों में विभक्त किया गया है। प्रथम खण्ड में प्रसूति-तन्त्र की विषय-सामिग्री दस अध्यायों में विभक्त है जिसमें स्त्री-प्रजननांग, आर्त्तव-चक्र, गर्भावक्रान्ति, गर्भिणी-परिचर्या, गर्भ-व्यापद्, गर्भिणी-व्यापद्, प्रसवप्रबन्धन, सूतिकोपक्रम, नवजात-परिचर्या आदि का आधुनिक ज्ञान सहित सांगोपांग एवं सचित्र वर्णन है। द्वितीय-खण्ड स्त्रीरोग विज्ञान से सम्बन्धित है, जिसकी विषय-सामिग्री छः अध्यायों में विभाजित की गयी है। छात्रों के सुविधार्थ आयुर्वेदीय संहिताओं में वर्णित 'योनिव्यापदों का मूलस्वरूप बनाये रखते हुए स्त्री जनननांगों के जन्मजात विकारों, आर्त्तव-व्यापद्, जननांगों के उपसर्गजनित रोगों, बन्ध्यत्व, गर्भाशय-च्युति, गर्भाशय-भ्रंश, योन्यर्श, अर्बुद आदि विकृतियों के अतिरिक्त कालोचित समस्या सन्तति निरोध एवं I.V.F. का सचित्र प्रस्तुतीकरण किया है। अन्त में स्वानुभूत औषध-योगों के घटक-द्रव्य, निर्माण-विधि, मात्रा आदि का प्रयोगात्मक विवरण देने का प्रयास किया गया है।
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